
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट (WSDS) को संबोधित किया। इस दौरान पीएम ने पहले गुजरात में और अब राष्ट्रीय स्तर पर अपने 20 वर्षों के कार्यकाल के दौरान पर्यावरण और सतत विकास मेरे लिए प्रमुख फोकस क्षेत्र रहे हैं।
टीईआरआई के उद्घाटन सत्र के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि एक अधिक टिकाऊ और न्यायसंगत दुनिया बनाने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने की मांग की गई है। मेरे 20 साल के कार्यकाल में पहले गुजरात में सबसे ज्यादा फोकस रहा और अब राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण और सतत विकास केंद्र के बिंदू में है। पीएम मोदी ने कहा कि हमने सुना है कि लोग हमारे ग्रह को नाजुक कहते हैं, लेकिन यह नाजुक नहीं है। हम नाजुक हैं। ग्रह, प्रकृति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी नाजुक रही है। गरीबों तक समान ऊर्जा पहुंचे। यही हमारी पर्यावरण नीति की आधारशिला हमेशा से रही है। हमनें उज्ज्वला योजना के जरिए स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन घर घर पहुंचाया। पीएम-कुसुम योजना का भी जिक्र किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऊर्जा को प्रदान करने से इनकार करना लाखों लोगों के जीवन को नकारने जैसा होगा। सफल जलवायु कार्रवाई के लिए पर्याप्त वित्त उपलब्ध होना भी आवश्यक है। इसके लिए, विकसित देशों को वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर अपने वादों को पूरा करने की आवश्यकता है। आगे कहा कि भारत का क्षेत्रफल विश्व की कुल भूमि का केवल 2.4 प्रतिशत है, लेकिन इसके पास विश्व की प्रजातियों का आठ प्रतिशत है। इस पारिस्थितिकी की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। हम अपने संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क को मजबूत कर रहे हैं। बता दें कि इस बार शिखर सम्मेलन टेरी की वार्षिक थीम ‘टुवर्ड्स ए रेजिलिएंट प्लैनेट: सुनिश्चित करने के लिए एक सतत और न्यायसंगत भविष्य’ रखी गई। जिसमें जलवायु परिवर्तन, सतत उत्पादन, ऊर्जा संक्रमण, वैश्विक साझा और संसाधन सुरक्षा सहित मुद्दों पर चर्चा की।



